LOTUS......

Let's beautify the world.........

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Ritambhara tiwari


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जीवित का अंतिम संस्कार ?????

Posted On: 27 Aug, 2013  
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social issues में

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“भारत! जहाँ अब बेटियां सुरक्षित नहीं”

Posted On: 20 Apr, 2013  
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सुकून आ गया…………………..

Posted On: 20 Sep, 2011  
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गाँधी बनाम अन्ना -Jagran Junction Forum

Posted On: 24 Aug, 2011  
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बलात्कार : समस्या और समाधान – Jagran Junction Forum

Posted On: 20 May, 2011  
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एक आशा!………भ्रस्टाचार के अंत की!

Posted On: 25 Mar, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

आदरणीय अजय जी! सर्वप्रथम आपका हार्दिक आभार कि आप समाज के उन महापुरुषों में से हैं जो स्त्री सशक्तिकरण के पक्षधर हैं.अब अपनी बात......... सर! निश्चित रूप से समाज में जितनी लड़कियां दुराचार कि शिकार हो रहीं हैं उस से कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं.स्पष्ट है कि हर पुरुष दुराचारी नहीं, पर ये तो आप भी मानेगे कि जो भी पीड़ित एवं उनके परिजन हैं उनके भय जायज़ हैं और एक संवेदनशील नागरिक और खास कर लड़की होने के नाते मेरा भय भी निर्मूल नहीं! ये कोई पूर्वाग्रह नहीं आये दिन आस पास होने वाली दुर्घटनाओ का असर है. पुरुष शारीरिक रूप से इतना बलशाली होता है कि कोई महिला उस से जबरदस्ती नहीं कर सकती और जहाँ तक महिलाओं के स्वयं सशक्त होने का प्रश्न है तो कभी अशिक्षा, परिवार में धन कि कमी होने पर बेटों को ही आगे बढ़ाने की प्राथमिकता,पराया धन सरीखी सोच , फिल्म व मीडिया द्वारा उपभोग की वस्तु बना दिया जाना....सभी दोषी हैं. पर उम्मीद है कि आप सरीखे लोग महिलाओं को सशक्त बनाने में जरुर सहयोग करेंगे.धन्यवाद!

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

आदरणीय ऋतंभरा जी अभिवादन! यह बात सत्य है कि विश्व पटल पर गत कुछ दशकों में समग्र भारत ने अपनी प्रतिष्ठा को बहुत आघात पहुँचाया है और आज शाइनिंग इंडिया दुष्कार्मिंग इंडिया में तब्दील हो गया है किन्तु लगता है आपने उपर्युक्त बातें हताशा में लिखी हैं जो कि उचित नहीं... स्मरण रहे कि आपके ब्लॉग का नाम - LOTUS तथा इसका विशेषण - 'Let's beautify the world……' है जो अपने आप में प्रचुर सकारात्मक उर्जा से भरपूर है. उचित होता यदि समस्या के मौलिक समाधान के कुछ बिंदु प्रस्तुत किए जाते. पूर्वाग्रहों से ग्रसित होकर समाधान नहीं निकलते. ----- "बहुत डर लगता है अब हर पल ! हर परिधान में , हर उम्र में डर लगता है, हर रिश्ते से डर लगता है , कहाँ जाएँ ? किस से रक्षा की विनती करें? समाज हमें स्वयं सशक्त भी तो नहीं होने देता !" आप सदैव से सशक्त थीं. अपनी संख्या इतनी बढ़ाएं कि पुरुष अल्पसंख्यक हो जाएँ. अन्याय का विरोध करना होगा चाहे अपना पति अपना बेटा अथवा अपना भाई ही क्यों न हो. स्त्री को खुद स्त्री का साथ देना होगा. देखिये फिर जमाना आपका है. शुभ कामनाएं!

के द्वारा: AJAY KUMAR CHAUDHARY AJAY KUMAR CHAUDHARY

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

सबसे पहले मैं ऋतंभरा जी को बधाई देना चाहूँगा जो उन्होंने इतना अच्छा लेख लिखा. @के.एम मिश्र जी, आप मुझे ये बताइए जिनका बलात्कार होता है क्या वोह बिकनी में घुमती है या मिनी स्किर्ट में, की क्या वोह चाहती है की कोई आये और उन्हें नोछे खसोटे, या फिर वोह जानबूझ कर अपना इज्ज़त लुटवाती है. और जहाँ तक भारतीयता का सवाल है तोह वोह आप खूब दिखा रहे है क्योकि भारतीय कभी अपनी गलती मानते ही कहाँ है हमेशा दुसरो पर डालते है (उसने ऐसा किया इसीलिए ऐसा हुआ वोह ऐसा न करती तोह ऐसा न होता).यही सब कर के तो हमेशा खुद को बचाते रहे है. मई आपको बता दू की इस तरह की जितनी भी घटनाये है उन में दशमलव १य २ प्रतिसत ही ऐसी होगी जिनका अपने ऊपर उल्लेख किया है.मजबूर औरते, छोटी बच्चियां होती है जिनका कोई कुसूर नही होता. कभी आप खुद को लड़की की जगह पर रख कर सोचिये. फिर आप खुद ही पता चल जायेगा की क्या सच है और क्या नही. और जहाँ तक बात है सजा की तोह बलात्कारी को कठोर से कठोर सजा तोह देनी ही चाहिए. क्योकि भय के बिना इस संसार में कुछ नही हो सकता. उनके दिल में डर तोह होना ही चाहिए की वोह ये कुकृत्य करने से पहले दस बार सोचे.

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के द्वारा: priyasingh priyasingh

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

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के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

ऋतम्भरा जी बहुत सही kaha है आप ने शुरुवात हम को अपने घर से अपने पड़ोस से करनी होगी | भ्रष्टाचार से सभी परेशां रहते है मगर अपना कोई कार्य जल्दी करवाना हो रिश्वत हम ही देते है यार जितने चाहे पैसे लग जाये काम जल्दी करवा देना, चाहे ये काम मेकेनिक के यहाँ करवाना हो चाहे सिलेंडर लेने के लिए नंबर जल्दी लगाना हो या किसी का कनेक्शन कोई मांगे या न मांगे हम जल्दी काम करवाने के लिए रिश्वत ले के खुद ही खड़े रहते है क्या होता है १०,५० रूपए से मगर शुरुवात हम खुद करते है और आने वाले दूसरे लोगो के लिए परेशनी का कारन भी बनते है | बापू तो नहीं आयेंगे मगर अपनी सोच अपना समाज हम को खुद ही बदलना होगा | आच्छे लेख के लिए बधाई |

के द्वारा: div81 div81

के द्वारा: Ritambhara tiwari Ritambhara tiwari

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के द्वारा: kmmishra kmmishra

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